Ranabaali X Review: रश्मिका-विजय की ‘राणाबाली’ लोगों को कैसी लगी? जानें- सोशल मीडिया रिव्यू

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विजय देवरकोंडा और रश्मिका मंदाना की मच अवेटेड फिल्म ‘राणाबाली’ सिनेमाघरों में रिलीज हो गई है. ये इस जोड़ी की शादी के बाद साथ में पहली फिल्म है. ऐसे में इस मूवी को लेकर फैंस में काफी एक्साइटमेटं भी है. वहीं इस फिल्म का फर्स्ट डे फर्स्ट शो देने वालों ने सोशल मीडिया पर इसका रिव्यू शेयर करना भी शुरू कर दिया. जानते हैं लोगों को ये फिल्म कैसी लगी है?

‘राणबाली’ लोगों को कैसी लगी?
शुरुआती रिव्यू में ‘राणबाली’ को दर्शकों से इसे मिला-जुला रिस्पॉन्स मिल रहा है. जहां कुछ दर्शकों ने लीड जोड़ी की केमिस्ट्री, दमदार डायलॉग्स और अंग्रेजों के अत्याचारों को दिखाने वाले सीन्स की तारीफ की है, वहीं कुछ लोगों ने फिल्म की स्लो स्पीड, बहुत ज़्यादा हिंसा और बैकग्राउंड स्कोर की आलोचना की है.

एक दर्शक ने फिल्म के पहले हाफ पर निराशा जताते हुए लिखा, “राणबाली, पहला हाफ काफी सुस्त है! विजय देवरकोंडा और रश्मिका के हिस्से अच्छे हैं और उन्हें बेहतरीन तरीके से पेश किया गया है, लेकिन बाकी कहानी बहुत धीमी, नीरस और कई जगहों पर ज़रूरत से ज़्यादा हिंसक है. अंग्रेजों वाले सीन कोई खास इमोशनल असर नहीं छोड़ पाते और उन्हें बहुत ही सिंपल तरीके से दिखाया गया है. अब तक तो बैकग्राउंड म्यूजिक  भी ​​काफी निराश करने वाला रहा है.”

 

सेकंड काफी है काफी स्लो
एक अन्य ने लिखा, “ रानाबाली रिव्यू – 2.5/5 फिल्म का पहला भाग काफी अच्छा है, जिसमें विजय देवरकोंडा ने शायद अपने करियर की सबसे बेहतरीन परफॉरमेंस दी है! विजय और रश्मिका की केमिस्ट्री बढ़िया है, और इंटरवल वाला हिस्सा काफी दमदार है. लेकिन, फिल्म का दूसरा भाग काफी स्लो और पहले से अंदाजा लगाने लायक है,  इसमें कई सीन बार-बार आते हैं और प्री-क्लाइमैक्स भी काफी फीका है, जिससे फिल्म का असर कम हो जाता है.कन्क्लूजन: शुरुआत दमदार, लेकिन अंत कमजोर. एक अच्छा मौका हाथ से निकल गया!”

 

कुछ हिस्से पहले से ही समझ आ जाते हैं
एक रिव्यू में फिल्म के मेन आइडिया की तारीफ की गई है, साथ ही इसकी कमियों को भी बताया गया है. दर्शक ने लिखा, “राणाबाली – ईमानदार कोशिश, लेकिन असर कम, ‘बीता हुआ कल भुला देना, आने वाले कल को छीन लेने जैसा है’  निर्देशक राहुल सांकृत्यायन ने फिल्म के जरिए यही बात समझाने की कोशिश की है. शुरुआत के कुछ मिनटों को छोड़ दें, तो वे काफी हद तक इसमें सफल भी रहे हैं. फिल्म का दूसरा हिस्सा भी ठीक-ठाक शुरू हुआ, लेकिन आगे चलकर कहानी पूरी तरह से प्रीडिक्टेबल हो गई.

लगभग हर सीन उसी तरह आगे बढ़ता है, जैसा कि दर्शक पहले से ही उम्मीद कर रहे होते हैं, जिससे इसमें कोई खास एक्साइटमेंट नहीं बचता. निर्देशक ने क्लाइमेक्स से ठीक पहले एक ट्विस्ट लाने की कोशिश की है, लेकिन ऐसे ट्विस्ट हम पहले भी कई फिल्मों में देख चुके हैं. इस तरह की फिल्मों का जॉनर (काफी पहले ही एक ऐसे मुकाम पर पहुंच चुका है, जहां अब कुछ भी नया करना मुश्किल है; इसलिए दर्शकों को बार-बार वही पुरानी चीजें देखने का अहसास होना स्वाभाविक है. “

 

एक यूजर ने की फिल्म के सेकंड हाफ की आलोचना
एक और दर्शक ने फिल्म के दूसरे हिस्से की कड़ी आलोचना करते हुए लिखा, “मेरा शो खत्म हो गया, दूसरा हिस्सा बहुत थकाऊ था… विजय की सारी मेहनत बेकार गई… फिल्म में सिर्फ रश्मिका का स्क्रीन पर आना ही अच्छा लगा!!” इस यूजर ने अजय-अतुल के म्यूजिक को भी काफी निराशाजनक बताया और फिल्म में दिखाई गई अत्यधिक हिंसा की आलोचना करते हुए इसे एक ऐसी फिल्म करार दिया जिसे आसानी से भुलाया जा सकता है

 

एक ने राणाबाली को बताया सबसे खराब फिल्म
एक ने कहा, “राणाबाली हाल के समय की सबसे खराब फिल्मों में से एक. यह सिनेमा के नाम पर सिर्फ क्रूरता और हिंसा का तमाशा है. इसमें महिलाओं, बच्चों और गरीबों के खिलाफ बेहिसाब खून-खराबा और हिंसा दिखाई गई है, और पीड़ितों के प्रति रत्ती भर भी संवेदना नहीं है. बेवकूफ विलेन, बिना किसी सोच-समझ के दिखाई गई वीरता और विजय देवरकोंडा का एकदम अजीब और बनावटी किरदार”

 

‘राणबाली’ के बारे में
राहुल सांकृत्यायन द्वारा निर्देशित और प्रमोद तम्मीनेनी द्वारा को-राइट, फिल्म में विजय देवरकोंडा ने एक विद्रोही योद्धा सिंगनमाला बोब्बिली राणाबली की भूमिका निभाई है. वहीं रश्मिका मंदाना जयम्मा, उनकी पत्नी और संघर्ष में साथी की भूमिका निभाती हैं, जबकि अर्नोल्ड वोस्लू एक ब्रिटिश कमिश्नर सर थियोडोर हेक्टर के रूप में दिखाई देते हैं.

நன்றி

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